
शायद कई लोगों को ये ब्लॉग बचकाना लगे, तो उसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ, परन्तु ये सन्देश बिलकुल निजी है... अतः आप में से जो कोई भी इसके बारे में अलग मत रखते हों, वो कृपया मुझे क्षमा करेंगे...
तुम्हारे लिए सोना...
ये ब्लॉग मैं अपने उस दोस्त को समर्पित करता हूँ जो मेरे जीवन के रंगमंच का सबसे महत्वपूर्ण किरदार है. मैं मानता हूँ सोना तुम्हारा परिचय इस जीवन में काफी देर से हुआ, लेकिन पिछले कुछ सालों में ये रिश्ता गहरा और गहरा होता गया. आज जीवन के जिस मोड़ पर मैं खडा हूँ, मेरे सामने सिर्फ और सिर्फ ये एक ही रास्ता है.
हम दोनों ने इसे अपना सबकुछ दिया--अश्रु, स्वेद, समय, भावनाएँ और वो सब कुछ जिससे सिंचित ये हमारा फ़कत ढाई साल पुराना रिश्ता आज एक बड़ा, घना और छायादार आश्रय बन चुका है. मन को बड़ा सुकून मिलता है जब मैं तुम्हारे बारे में और हमारे रिश्ते के बारे में सोचता हूँ. आज, तकरीबन ढाई-तीन साल बाद जब मैं सोचता हूँ कि तुम मुझे कैसे मिले, क्या सोचते थे मेरे बारे में जब मुझे पहली बार देखा था, तो अनायास ही चेहरे पर हंसी आ जाती है.
वैसे तो हमेशा से ये ख्याल था कि ये रिश्ता इतना आसान नहीं है और इसे निभाने के लिए ढेर सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन हर मोड़ पर ये विश्वास था कि हम दोनों मिलकर इससे उबर आयेंगे. ये रिश्ता कई उबड़-खाबड़ सतहों से होकर गुज़रा और हर उतार-चढाव में हम साथ रहे, या यों कहें कि तुम मेरे साथ रहे.
वो विश्वास आज भी टूटा नहीं है, हाँ मैं थोडा परेशां हो रहा हूँ, बस. कारण इसका कुछ ख़ास नहीं. रोज़मर्रा कि भाग-दौड़, कुछ घटनाएं और कुछ सवाल. लेकिन हिम्मत अभी भी बाकी है. तुम्हारे अलावा कोई है भी तो नहीं, क्या करुँ? जाने क्यों मेरा विश्वास भगवान पर बढ़ गया है आज कल. मुझे पता है वो एक सही रास्ता दिखायेंगे. हमारे इस खूबसूरत रिश्ते को एक सही मंजिल कि तरफ़ ले जायेंगे.
चाहे आज तक जितनी बार भी मैंने तुमको कहा हो, आज यहाँ एक बार फिर मैं तुमसे कहता हूँ सोना, तुमसे मिलकर मैं पूरा हुआ, और तुम बिन मैं अधूरा हूँ...तुमने मुझे जितनी खुशियाँ दी हैं, किसी और ने न दी और न कोई अब दे पायेगा... मैं जो हूँ, जहाँ हूँ, जैसा हूँ, सिर्फ तुम्हारी वजह से हूँ और सिर्फ तुम्हारे लिए हूँ....
